Tuesday, October 18, 2022

चाय शायरी

 



आगे की ज़िंदगी कुछ इस कदर जीना चाहते हैं❣️

हर सुबह की चाय साथ तुम्हारे पीना चाहते हैं ,,❣️ 

  विवेक शुक्ला की कलम से ❣️ 





Friday, October 7, 2022

इश्क़ की बीमारी

 







सबकुछ तो वही पुराना है फिर ये नयी सी खुमारी क्या है  , 

दिल तो दुरुस्त है फिर ये धड़कनों की बीमारी क्या है ,,

बिना पूछे ही हमने तो बयां कर दी हालात अपनी  ,

तुम भी कहो मोहब्बत में हालात तुम्हारी क्या है ,,


विवेक शुक्ला की कलम से 



Monday, September 12, 2022

हौसलों की शायरी

 


आसमानों में उड़ने को, हौसलों के पर रखते हैं , 

हम तूफानों से भी, लड़ने का जिगर रखते हैं 

हमे लहरों का खौफ़ नहीं, हम भवँर में तैरने का हुनर रखते हैं

Motivational Quote  , Motivational Shayari 







Thursday, July 14, 2022

आँखे सलाखें

 





आशिकों को अक्सर मिलता है सफर सलाखों का , 

हसीनाओं से बचकर रहना खेल बुरा है आँखों का ,, 


       विवेक शुक्ला की कलम से 



Friday, June 3, 2022

आशिक़ पानीपुरी वाला

 



उन्ही पुराने गीतों पर झूमता हूँ ,

आज भी तेरी गलियों में घूमता हूँ ,,

खरीद लिया है ठेला तेरे नाम का ,

तेरे शहर में ही पानीपुरी बेचता हूँ  ,,

        विवेक शुक्ला की कलम से 


Tuesday, May 24, 2022

अकेलेपन पर कविता

 




जगाकर अपनी रातों को , क्यों ख़्वाब चाहत के बुनता है ,,

मतलब के सारे साथी हैं , यहां किसे तुम्हारी चिंता है ,,

कहते हैं सब अपनी अपनी , है कौन तुझे जो सुनता है ,,

मन के एकाकीपन में , दिल सम्मति यही सब गुनता है ,,


              विवेक शुक्ला की कलम से 







Thursday, May 19, 2022

चाँद पर कविता

 



मेरे शहर से जरा सी दूरी पर है भवन मेरा ,

रास्तों की खूबसूरती पर लगता है मन मेरा ,,

चाँद दिखता सफर में जब शहर में होता गमन मेरा ,

सुना है कल से अमावस होगी कैसे लगेगा मन मेरा ,,


      विवेक शुक्ला की कलम से 



Sunday, May 8, 2022

माँ को समर्पित कविता

 

माँ को समर्पित कविता 

हे जन्मधात्री हे जन्मभूमि ये जीवन तुझको अर्पित है ,

तूने ही सब दिया है और सबकुछ तुझे समर्पित है ,,

जब जब विपदा आती तेरा आँचल करता रक्षा मेरी ,

शरण में वो भी आते हैं छोड़ गए जो सरजमीं तेरी ,,

हर रोग, व्याध दुःख दर्द से माँ तूने सदा बचाया है ,

हठ, क्रोध से अनजाने में हमने तुझे सताया है ,,

तुझी से पाते जन्म सभी पलता तुझसे संसार है ,

 हे जन्मधात्री हे जन्मभूमि तेरा गौरव आपार है ,,  

               विवेक शुक्ला की कलम से 








Thursday, April 28, 2022

बिजली कटौती पर दर्दभरी कविता

 


बिजली कटौती पर कविता 

जो तुम हो पास तो ज़िंदगी में रोशनी है  ,

वर्ना हर तरफ अंधेरा है गर्मी है बेचैनी है ,,

मगर न जाने कहाँ रहती हो तुम आजकल ,

इंतज़ार करते करते दिन जाता है निकल ,,

रात भर रहते हैं बेचैन तुम्हारे इंतज़ार में ,

आके भी तुम रुकती नहीं एकबार में ,,

24 घण्टे रहने के वादे थे अखबार में ,

भुला दिया तुमने आते ही सरकार में ,,


    विवेक शुक्ला की कलम से










Wednesday, April 6, 2022

उर्वशी की नजरें अनारकली का हुस्न




ये माना कि तुम्हारा हुस्न है जैसे अनारकली ,

लेकिन मोहब्बत की नजर सलीम को भी न मिली ,, 

और तुमसे तो लाख गुना हमारी उर्वशी ही भली  ,

बरसी मोहब्बत की नजर हर किसी पर गुजरा जो उस गली ,,