Saturday, October 12, 2024

लोग जलाते रहे हर दफा कागज़ी पुतले को , रावण सबके मन के भीतर जिंदा रहा ,,

 


सत्य की जीत मनाते हैं वे भी विजयदशमी को ,

सदा असत्य से ही चलता जिनका धंधा रहा ,,

लोग जलाते रहे हर दफा कागज़ी पुतले को ,

रावण सबके मन के भीतर जिंदा रहा ,,


विवेक शुक्ला की कलम से 



Thursday, October 3, 2024

जीवन की बाधाओं से न डरो काल के फन पर नृत्य करो

 



जीवन हो लाख विषाक्त मगर तुम न अशक्त बनो ,

काल के फन को रंगमंच बना तुम उस पर नृत्य करो ,,

विवेक शुक्ला की कलम से