Tuesday, September 12, 2023

कुछ बातें बस मौसमी बाहर होती हैं

 



माना की मेरे हर शेरों में हसीना और शराब होती हैं ,

आदतन शायरों की हर बातें हुस्न की तलबदार होती हैं ,,

पर मेरी जां बातों से न परखा करो किरदार को मेरे ,

कुछ बातें हकीकत नहीं बस मौसमी बहार होती हैं ,, 


विवेक शुक्ला की कलम से 



Sunday, September 10, 2023

वफ़ा , किरदार , भरोसा शायरी

 


हर सुबह और शाम साथ में जिनके कटती हो ,

दिनभर साथ में जिनके खूब गुफ्तगू चलती हो ,,

क्या ख़ाक करते हैं वो भरोसा मेरे किरदार का ,

अगर उन्हें भी वफ़ा कहकर जतानी पड़ती हो ,,


विवेक शुक्ला की कलम से