Monday, August 30, 2021

कातिल निगाहें हुस्न शायरी




किस्से और कहानियां सबके हैं बरखुरदार ,
यहां हर किसी का है अपना अपना किरदार ,,
कहीं हुस्ने खंजर तो कहीं कातिल निगाहों का वार ,
इश्क़ की जंग में कमबख्त ये दिल हारा हरबार ,,


 

 

Thursday, August 12, 2021

धार्मिक नफरत पर शायरी



न खींचो नफरतों की लकीरें मेरे शहर में ,,
यहां की मोहब्बत ही यहां की खूबसूरती है,,

धार्मिक नफरत शायरी , मजहबी नफरत शायरी , 
विवेक शुक्ला की कलम से