वे समझते हैं मुझमें जान नहीं है,
उन्हें अभी मेरी पहचान नहीं हैं,,
वे समझते हैं कुंए को दुनिया ,
उन्हें अभी समुंदर का ज्ञान नहीं है ,,
विवेक शुक्ला की कलम से