Tuesday, May 24, 2022

अकेलेपन पर कविता

 




जगाकर अपनी रातों को , क्यों ख़्वाब चाहत के बुनता है ,,

मतलब के सारे साथी हैं , यहां किसे तुम्हारी चिंता है ,,

कहते हैं सब अपनी अपनी , है कौन तुझे जो सुनता है ,,

मन के एकाकीपन में , दिल सम्मति यही सब गुनता है ,,


              विवेक शुक्ला की कलम से 







Thursday, May 19, 2022

चाँद पर कविता

 



मेरे शहर से जरा सी दूरी पर है भवन मेरा ,

रास्तों की खूबसूरती पर लगता है मन मेरा ,,

चाँद दिखता सफर में जब शहर में होता गमन मेरा ,

सुना है कल से अमावस होगी कैसे लगेगा मन मेरा ,,


      विवेक शुक्ला की कलम से 



Sunday, May 8, 2022

माँ को समर्पित कविता

 

माँ को समर्पित कविता 

हे जन्मधात्री हे जन्मभूमि ये जीवन तुझको अर्पित है ,

तूने ही सब दिया है और सबकुछ तुझे समर्पित है ,,

जब जब विपदा आती तेरा आँचल करता रक्षा मेरी ,

शरण में वो भी आते हैं छोड़ गए जो सरजमीं तेरी ,,

हर रोग, व्याध दुःख दर्द से माँ तूने सदा बचाया है ,

हठ, क्रोध से अनजाने में हमने तुझे सताया है ,,

तुझी से पाते जन्म सभी पलता तुझसे संसार है ,

 हे जन्मधात्री हे जन्मभूमि तेरा गौरव आपार है ,,  

               विवेक शुक्ला की कलम से