वे समझते हैं मुझमें जान नहीं है,
उन्हें अभी मेरी पहचान नहीं हैं,,
वे समझते हैं कुंए को दुनिया ,
उन्हें अभी समुंदर का ज्ञान नहीं है ,,
विवेक शुक्ला की कलम से
वे समझते हैं मुझमें जान नहीं है,
उन्हें अभी मेरी पहचान नहीं हैं,,
वे समझते हैं कुंए को दुनिया ,
उन्हें अभी समुंदर का ज्ञान नहीं है ,,
विवेक शुक्ला की कलम से
माना की मेरे हर शेरों में हसीना और शराब होती हैं ,
आदतन शायरों की हर बातें हुस्न की तलबदार होती हैं ,,
पर मेरी जां बातों से न परखा करो किरदार को मेरे ,
कुछ बातें हकीकत नहीं बस मौसमी बहार होती हैं ,,
विवेक शुक्ला की कलम से
हर सुबह और शाम साथ में जिनके कटती हो ,
दिनभर साथ में जिनके खूब गुफ्तगू चलती हो ,,
क्या ख़ाक करते हैं वो भरोसा मेरे किरदार का ,
अगर उन्हें भी वफ़ा कहकर जतानी पड़ती हो ,,
विवेक शुक्ला की कलम से
जो हसीनों के ख्वाबों में रातें बिताएं बैठें हैं
वही दर्द की महफिलों में लाइनें लगाएं बैठें हैं
हमने तो सोचा था कि एक हमी हैं दुनिया में
मुशायरें में पहुँचा तो जाना लाखों दिल पर चोट खाये बैठें हैं
विवेक शुक्ला की कलम से
इश्क़ 💓 से बढ़कर भी हैं कुछ नियम और कायदे ☑️
यहां हसीनों 💃 से दूरियों के हैं अपने फायदे
विवेक शुक्ला की कलम से
जब लोग पुराने मिलते हैं , कुछ बात पुरानी होती है ,,
कुछ किस्से तो खुल जातें हैं , कुछ बात छुपानी होती है ,,
जब जिक्र तुम्हारा होता है , कुछ मजेदार कहानी होती है ,,
लोग तो बढ़ जाते हैं , बचपन की यादें कब सयानी होती हैं ,,
उन्हीं सुनहरी यादों संग , एक उम्र बितानी होती है ,,
बचपन बीता बेफिक्री में , परेशान जवानी होती है ,,
विवेक शुक्ला की कलम से
संघर्ष करने वालों की कभी हार नहीं होती
धमकियां शासक हर रोज सुनाता है ,
विरोध करने वालों पर एस्मा NSA लगाया जाता है ,,
डरते नहीं विधुतकर्मी तानाशाही और मनमानी से ,
मिलता है साहस और विश्वास गांधी की कहानी से ,,
लोकतंत्र में हड़ताले अपराध नहीं होती ,
संघर्ष करने वालों की कभी हार नहीं होती ,,
विवेक शुक्ला की कलम से