जब लोग पुराने मिलते हैं , कुछ बात पुरानी होती है ,,
कुछ किस्से तो खुल जातें हैं , कुछ बात छुपानी होती है ,,
जब जिक्र तुम्हारा होता है , कुछ मजेदार कहानी होती है ,,
लोग तो बढ़ जाते हैं , बचपन की यादें कब सयानी होती हैं ,,
उन्हीं सुनहरी यादों संग , एक उम्र बितानी होती है ,,
बचपन बीता बेफिक्री में , परेशान जवानी होती है ,,
विवेक शुक्ला की कलम से

