उन्ही पुराने गीतों पर झूमता हूँ ,
आज भी तेरी गलियों में घूमता हूँ ,,
खरीद लिया है ठेला तेरे नाम का ,
तेरे शहर में ही पानीपुरी बेचता हूँ ,,
विवेक शुक्ला की कलम से