Thursday, April 28, 2022

बिजली कटौती पर दर्दभरी कविता

 


बिजली कटौती पर कविता 

जो तुम हो पास तो ज़िंदगी में रोशनी है  ,

वर्ना हर तरफ अंधेरा है गर्मी है बेचैनी है ,,

मगर न जाने कहाँ रहती हो तुम आजकल ,

इंतज़ार करते करते दिन जाता है निकल ,,

रात भर रहते हैं बेचैन तुम्हारे इंतज़ार में ,

आके भी तुम रुकती नहीं एकबार में ,,

24 घण्टे रहने के वादे थे अखबार में ,

भुला दिया तुमने आते ही सरकार में ,,


    विवेक शुक्ला की कलम से










Wednesday, April 6, 2022

उर्वशी की नजरें अनारकली का हुस्न




ये माना कि तुम्हारा हुस्न है जैसे अनारकली ,

लेकिन मोहब्बत की नजर सलीम को भी न मिली ,, 

और तुमसे तो लाख गुना हमारी उर्वशी ही भली  ,

बरसी मोहब्बत की नजर हर किसी पर गुजरा जो उस गली ,,