आगे की ज़िंदगी कुछ इस कदर जीना चाहते हैं❣️
हर सुबह की चाय साथ तुम्हारे पीना चाहते हैं ,,❣️
विवेक शुक्ला की कलम से ❣️
आगे की ज़िंदगी कुछ इस कदर जीना चाहते हैं❣️
हर सुबह की चाय साथ तुम्हारे पीना चाहते हैं ,,❣️
विवेक शुक्ला की कलम से ❣️
सबकुछ तो वही पुराना है फिर ये नयी सी खुमारी क्या है ,
दिल तो दुरुस्त है फिर ये धड़कनों की बीमारी क्या है ,,
बिना पूछे ही हमने तो बयां कर दी हालात अपनी ,
तुम भी कहो मोहब्बत में हालात तुम्हारी क्या है ,,
विवेक शुक्ला की कलम से