Sunday, September 10, 2023

वफ़ा , किरदार , भरोसा शायरी

 


हर सुबह और शाम साथ में जिनके कटती हो ,

दिनभर साथ में जिनके खूब गुफ्तगू चलती हो ,,

क्या ख़ाक करते हैं वो भरोसा मेरे किरदार का ,

अगर उन्हें भी वफ़ा कहकर जतानी पड़ती हो ,,


विवेक शुक्ला की कलम से 



No comments:

Post a Comment