कैसे लगे भला मन , जब विलग प्राण से तन हो जाए ,,
कृष्ण चले जब द्वारिका , और राधा वृंदावन रह जाए ,,
ऊधौ कहो भला क्यों , ब्यथित न तन मन हो जाए ,,
कैसे रुके ये अश्रु , जब दूर भगत से भगवन हो जाएं ,,
विवेक शुक्ला की कलम से
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