हुस्न की गलियों में दिल के मर्ज की दवा न खोजो ,
ये बेवफाओं का शहर है यहाँ वफ़ा न खोजो ,,
दिल लगाके हसीनाओं से टूटकर बिखर जाओगे ,
हर चमकते चेहरों पर जीने की वजह न खोजो ,,
विवेक शुक्ला की कलम से
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